नौसेना मे शामिल हुई पनडुब्बी वागिर, दुश्मन का रेडार भी नहीं पकड़ पाएगा

मुंबई। मझगांव डाक पर गुरुवार को स्कोर्पियन श्रेणी की पाँचवी पनडुब्बी वागिर नौसेना के बेड़े में शामिल हुई ।  इसका रक्षा राज्यमंत्री श्रीपद नाईक ने ऑनलाइन लोकार्पण किया । 

वेस्टर्न नेवल कमांड चीप वॉइस एड्मिरल आरबी पंडित ने कहा की वागिर पानी मे छिपकर दुश्मन के रेडार को चकमा देने, आधुनिक ध्वनि को सोखने वाली तकनीक से लैस है । 

यह टारपीडो से हमला करने के साथ ही ट्यूब से लॉंच की जाने वाली पोत रोधी मिसाइलों को पानी के अंदर और सतह से छोड़ सकती है । वागिर आने वाले एक साल मे कमीशंड होने की उम्मीद है ।  

इस पनडुब्बी का नाम वागिर क्यों रखा गया ?

इस पनडुब्बी का नाम हिन्द महासागर की शिकारी मछली वागिर के नाम पर है । पहली वागिर पनडुब्बी रूस से मिली थी, जिसे नौसेना में 1973 को शामिल किया गया और जून 2001 में यह रिटायर हुई । 

प्रोजेक्ट -75 

वागिर देश में बनने वाली छह कलावरी श्रेणी के पनडुब्बीयों मे से एक है । इसे फ्रेंच नेवल डिफेंस और एनर्जी कंपनी डीसीएनएस ने डिजाइन किया है और हमारी नौसेना के प्रोजेक्ट-75 के तहत तैयार की जा रही है । 

vagir

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